Mantra for Life – पाप से घृणा करो पापी से नहीं

Mantra for Life
Pic: Wikimedia

कर्म करना एक क्रिया है और जब कोई क्रिया होती है तो उसके गुणों के आधार पर अच्छा बुरा मानकर पाप-पुण्य के रुप में परिभाषित किया जाता है ।

अतः यह कहना कि पाप से घृणा करो व उसे करने वाले पापी से नहीं सर्वथा अशुद्ध है ।

जब कोई बुरे काम करेगा तभी तो वह पाप होगा और उसे करने वाले को पापी कहा जायेगा।

तात्पर्य यह है कि बुरे कर्म करने से ही तो पाप हुआ और अगर वह न किया जाय तो कोई पाप नहीं हुआ

इसलिए किसी व्यक्ति द्वारा कार्य को किये जाने की प्रवृति ही तो प्रमुख हुई।

उस स्थिति में पाप कर्म करने वाला ही तो घृणा का पात्र बनेगा और न्याय द्वारा दण्डित भी होगा।

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